श्री ब्रह्मकन्या विद्यापीठ आंबलगढ़
श्री औदिच्य राजपुरोहित शिक्षण संस्थान
परम श्रद्धेय गोऋषि स्वामी श्री दत्तशरणानन्दजी महाराजश्री के पावन सान्निध्य में संचालित
शैक्षणिक विकास
भारतीय शिक्षा दर्शन के आधार पर ऋषि कुमारियों के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न आधारभूत आयामों की परिकल्पना की गई है। स्थापित मानक के आधार पर प्रत्येक आयाम से संबंधित निम्न क्रियाकलाप किए जाते हैं –
(1) शैक्षणिक विकास –
(प) स्मार्ट क्लास
(1) शैक्षणिक विकास –
(प) स्मार्ट क्लास
(पप) कम्प्यूटर क्लास
(पपप) पुस्तकालय एवं वाचनालय
(पअ) शैक्षणिक सुविधा हेतु विभिन्न विषयों के चित्रांकित चार्ट, ग्लोब, भौगोलिक नक्शे आदि की उपलब्धता।
(अ) छोटे बच्चों के आकर्षक खिलोने, चित्रांकित, पोस्टर, संगीतमय कविताएँ, कहानियां आदि के माध्यम से पढ़ाने की व्यवस्था है।
(अप) प्रत्येक विषय में सप्ताह में एक बार कक्षा टेस्ट का प्रावधान है।
(अपप) डाउट क्लास की व्यवस्था है।
(अपपप) छात्राओं के कमज़ोर विषयों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं की पूर्ण व्यवस्था है।
(पग) विषय विशेषज्ञों के व्याख्यान (माह में एक बार)
(ग) सत्र पर्यन्त प्रत्येक माह दो प्रतियोगिताओं का आयोजन –
(1) भाषा प्रतियोगिता (2) वाद-विवाद (3) निबंध लेखन
(4) क्विज़ (5) कहानी लेखन (6) कविता पाठ
(7) आशु भाषण आदि
(गप) संवाद कौशल विकास के अन्तर्गत तत्कालीन विषय विशेष पर लघु संभाषण/सामूहिक परिचर्चा
(गपप) सत्र में एक बार शैक्षणिक टूर।
(गपपप) विद्यापीठ के स्टाफ़ रूम में एक गूगल यंत्र ‘‘एलेक्सा‘‘ उपलब्ध है। जिससे अपेक्षित त्वरित जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
(2) नैतिक, आध्यात्मिक एवं मानसिक विकास –
(प) प्रातः प्रार्थना के पश्चात् नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों पर छात्राओं द्वारा पंाच मिनट की प्रस्तुति।
(पप) एक सुविचार मुख्य बोर्ड पर नित्य लिखने का नियम।
(प्रत्येक कक्षा से क्रमानुसार एक छात्रा की जिम्मेदारी रहती है)
(पपप) प्रार्थना सत्र में ही प्रतिदिन छात्रा द्वारा प्रमुख समाचारों का वाचन किया जाता है।
(पअ) प्राणायाम एवं योगाभ्यास
(अ) विशेष अवसरों पर छात्राओं द्वारा बौद्धिक विषयों पर प्रस्तुति।
(3) सांस्कृतिक कार्यक्रम – किसी भी राष्ट्र की, समाज की पहिचान संस्कृति से ही होती है। विद्यापीठ की समस्त छात्राओं को देश-विदेश और भारत के विभिन्न राज्यों की संस्कृति से भलीभांति अवगत कराने हेतु सत्र पर्यन्त बहुत से कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
(प) प्रत्येक सत्र में भारत के किसी एक राज्य को प्रधानता से लिया जाता है जिसमें उस राज्य का विस्तृत अध्ययन कराया जाता है। उस राज्य के जिले, राजधानी, राजनैतिक, सामाजिक, भौगोलिक, जनसंख्या, उद्योग, कृषि, खनिज-लवण, क्षेत्रफल, ऐतिहासिक विशेषताएँ, रीति-रिवाज़, खान-पान, त्योंहार, वेश-भूषा, बोली-भाषा, विभिन्न कलाएं, साहित्य आदि की समग्र जानकारी छात्राओं को एकत्रित करनी होती हैं। इन सभी को विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से, टूर के माध्यम से, प्रोजेक्टर पर दिखाकर निटकता से समझाने का प्रयास विद्यापीठ में किया जाता है।
प्रतियोगिताएँ – गीत, संगीत, एकल नृत्य, समूह नृत्य, ड्राईंग एण्ड पेन्टिंग, एकांकी, नाटक, रंगोली, मेंहदी आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।
(4) खेल-कूद – समय सारिणी में एक कलांश खेल कूद का रहता है। विद्यापीठ में बहुत से खेलों की प्रतिस्पर्धा भी कराई जाती है। इन्डोर और आउटडोर दोनों ही प्रकार के गेम्स, छात्राएँ अपनी रूचि के अनुसार चयन करती हैं। (प) केरम, (पप) टेबिल टेनिस (पपप) बेडमिन्टन, (पअ) वॉली-बॉल, (अ) बास्केटबॉल, (अप) दौड़, (अपप) खो-खो, (अपपप) लोंग जम्प, (पग) हाई जम्प, (ग)
गोला फेंक आदि की पूर्ण सुविधा है। सभी खेलों के पर्याप्त मैदान है।
(5) जिम एवं झूले – विद्यापीठ परिसर में ओपन जिम पर व्यायाम की
सुविधा एवं छोटे बड़े सभी बच्चों के लिए झूले लगे है।
निश्चय ही श्री ब्रह्म कन्या विद्यापीठ में ऋषिकुमारियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए ही उक्त सभी कार्यक्रम, सुविधाएँ प्रदान की गई हैं। यहां के सुन्दर बगीचे, पुष्प वाटिकाएँ, लताएँ नित्य अपना सौन्दर्य बिखेरते हैं। प्रत्येक क्षण बसन्त बना रहता है। सर्वत्र अध्ययन का वातावरण बालिकाओं के मन को आनन्दित करता है। खेल-खेल में ही कन्याओं का स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है।
परिचय
भारतीय संस्कृति में प्राचीन ऋषि प्रणित शिक्षा का सर्वथा लोप होना प्रत्यक्ष दिखाई देता है। शिक्षा का सामान्य अर्थ हमारी अंतर्निहित क्षमताओं का प्रकटीकरण ही है।