श्री ब्रह्मकन्या विद्यापीठ आंबलगढ़

श्री औदिच्य राजपुरोहित शिक्षण संस्थान

परम श्रद्धेय गोऋषि स्वामी श्री दत्तशरणानन्दजी महाराजश्री के पावन सान्निध्य में संचालित

छात्रावास

विद्यापीठ परिसर में एक सुन्दर छात्रावास का निर्माण किया गया है जो कि सभी सुविधाओं से युक्त है। सभी कमरों में अटैच्ड वॉशरूम है। गरम पानी के लिए गीज़र लगे हैं। 

छात्रावास के प्रत्येक कक्ष में छात्राओं के पढ़ने के लिए टेबल, कुर्सी, अलमारी एवं शयन के लिए पलंग मय स्वच्छ बिस्तर उपलब्ध है।
प्रत्येक पांच कमरों पर एक वार्डन है तथा उन सभी पर एक अधीक्षक वार्डन है। ये सभी मिलकर ही छात्राओं को अत्यन्त स्नेह से रखती हैं, उचित देखभाल करती हैं, किसी भी प्रकार की समस्या आने पर तुरंत समाधान करती हैं। 

छात्रावास प्रांगण में सुन्दर बगीचा है व खेल-कूद के लिए उपयुक्त मैदान भी है। उत्तम भोजनशाला है जहाँ शुद्धता के साथ, मधुर मंत्रो का उच्चारण करते हुए भोजन पकाया जाता है। 

(1) भोजन व्यवस्था – सुबह के बालभोग में अंकुरित मूंग, मौठ, चना आदि को भाप लगाकर दही अथवा नींबू के साथ स्वादिष्ट बनाकर दिया जाता है। कभी नमकीन दलिया तो कभी मीठा दलिया, पोहे, जलेबी, उत्पम, थेपले आदि भांति-भांति के व्यंजन ऋषि कन्याओं को बड़े ही प्रेम से परोसे जाते हैं।

 दिन का भोजन दाल, रोटी, सब्जी, चावल, छाछ, दही की पूर्णता के साथ होता है। शाम स्कूल से आने के बाद पुनः विशेष आकर्षक नाश्ता जिसमें कभी खमन-ढ़ोकला, कभी दाल के चीले, मीठे नमकीन पकौड़े, नमकीन भुजिया, इडली, डोसा, चटनी, सांभर बड़ा आदि-आदि प्रसाद रूप में परोसा जाता है। साथ ही कभी मौसमी
फल दिये जाते हैं। 

रात्रि के भेजन में सब्जी, रोटी और दूध प्रदान किया जाता है। कभी भी बच्चों को भूख लगने पर व्यवस्थार्त प्रत्येक वार्डन के पास भुने हुए चने, मूंगफली, मूंग, मौठ आदि उपलब्ध कराए जाते हैं।

 
(2) मंदिर व गौशाला – छात्रावास में माँ सरस्वती का बहुत ही सुन्दर मंदिर है जहाँ गणेश जी व हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थापित है। साथ ही एक छोटी सी गोशाला भी है। जहां प्यारी-प्यारी गोमाताएँ अपने मन मोहक बछड़ो के साथ निवास करती है और अपने दूध व दूध से निर्मित दही, छाछ, मक्खन आदि से कन्याओं को पोषित करती है। गैया मैया का नित्य पूजन अर्चन होता है। 

संध्याकाल में सभी ऋषि कन्याएँ वीणा-वादिनी माँ सरस्वती के श्री चरणों में बैठकर स्तुति व आरती करती हैं। आवासीय विद्यापीठ में ‘‘मानस‘‘ ग्रंथ को केन्द्र में रखते हुए ही ऋषि कुमारियों के व्यक्तित्व का निर्माण किया जा रहा है। यहां बालिकाएं ‘‘मानस मुक्ता‘‘ को आत्मसात करते हुए अद्वितीय व्यक्तित्व की धनी बन सके इस निमित्त शाम की आरती के पश्चात् ‘रामचरित मानस‘ के एक पृष्ठ का सामूहिक रूप से पाठ किया जाता है। प्रत्येक रविवार को प्रातः 9 बजे ऋषि कुमारियों द्वारा गोपुष्टि यज्ञ किया जाता है।

 
(3) वाचनालय छात्रावास परिसर में एक वाचनालय है जहाँ दैनिक समाचार-पत्र, मासिक व पाक्षिक पत्रिकाएँ, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु करन्ट अफेयर्स, सी.एस.आर. प्रतियोगिता दर्पण, मूमल आदि पत्रिकाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
पाठ्य पुस्तकों के अतिरिक्त सभी विषयों की सहायक पुस्तकें-कला, विज्ञान, बाल निर्माण, भारतीय आर्ष ग्रन्थ आदि उपलब्ध हैं। यहाँ बालिकाओं को पढ़ने का पूर्ण वातावरण प्राप्त होता है।

 
(4) स्मार्ट रूम – एक स्मार्ट कक्ष में प्रोजेक्टर के द्वारा विविध विषयों के विषय विशेषज्ञों के सब्स्क्राइब व्याख्यान की एक घंटे की कक्षा होती है इसमें भारत का आरंभ से वर्तमान तक का इतिहास जिसमें राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक परिदृश्य की वृहद् जानकारी मिलती है। 

भारतीय तथा विश्व भूगोल की जानकारी, विज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिकों और उनके आविष्कारों को तथा आधुनिक तकनीक की जानकारी आदि प्रोजेक्टर पर दी जाती है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक वार्डन के पास एक एलेक्सा नामक गूगल यंत्र उपलब्ध रहता है।
(5) कम्प्यूटर कक्ष – आवास में एक कम्प्यूटर कक्ष भी है जहां बालिकाओं को कम्प्यूटर की बेसिक जानकारी प्रदान की जाती है। 

(6) कौशल विकास – ग्रीष्म व शीतकालीन अवकाशों में विशेष कैम्प लगाये जाते हैं जिसमें विभिन्न गतिविधियों के साथ कौशल विकास में सहायक गतिविधियाँ जैसे-सिलाई, बुनाई, कढ़ाई, आचार व मंगोड़ी बनाना, आलू-केले के चिप्स आदि बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है।

(7) मनोरंजन कक्ष – एक बड़े स्क्रिन का टी.वी. जिस पर प्रतिदिन देश-विदेश के समाचार तथा अन्य अवकाश के समय धार्मिक एवं ज्ञानवर्द्धक कार्यक्रम दिखाये जाते हैं। इसी कक्ष में कैरम बोर्ड, सांप-सीढ़ी, लूडो आदि उपलब्ध हैं। इसी कक्ष में एक म्यूजिक सिस्टम भी लगा है जिससे छात्राएं भारतीय शास्त्रीय संगीत, कत्थक नृत्य, लोक नृत्य आदि का अभ्यास करती है। इसी क्रम में सप्ताह में एक दिवस एक संगीत शिक्षिका प्रशिक्षण हेतु आमंत्रित की जाती है। उपर्युक्त सभी गतिविधियों के लिए अलग-अलग समय सीमा निर्धारित है।

 
(8) शारीरिक व्यायाम और खेल-कूद – परिसर में शारीरिक व्यायाम हेतु ओपन जिम, झूले व अन्य खेल जैसे वॉलीबॉल, बास्केट बॉल, खो-खो, दौड़, गोला फेंक, टेबल टेनिस, बेडमिन्टन, लौंग जम्प, हाई जम्प आदि की व्यवस्था उपलब्ध है।
उपरोक्त सभी गतिविधियों के लिए डेढ़ घंटे की समय सीमा निर्धारित है। छात्राएँ अपनी रूत्रि के अनुसार सभी सुविधाओं का उपयोग करती हैं।

 
(9) चिकित्सा व्यवस्था – ऋषि कुमारियों के लिए आवश्यकता पड़ने पर प्राथमिक चिकित्सा की पूर्ण व्यवस्था है। आकस्मिक अस्वस्थता के समय योग्य चिकित्सकों द्वारा चिकित्सा कराई जाती है जिसकी सूचना अभिभावक को भी दी जाती है। एक गाड़ी मय ड्राईवर आपातकालीन सेवा हेतु 24 घंटे परिसर में उपलब्ध रहती है।

 
(10) सामान्य सुविधाएँ – छात्रावास में सतत् विद्युत आपूर्ति हेतु जेनरेटर की सुविधा उपलब्ध है। छात्राओं के लिए शुद्ध पेयजल, वॉशिंग मशीन तथा सिलाई मशीन की सुविधा है।

 
(11) सेवा कार्य – सेवा कार्य से छात्राओं में भावनात्मकता का विकास होता है इस विषय को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रकार के सेवा कार्य करने के लिए छात्राओं को प्रोत्साहित किया जाता है – जैसे भोजन शाला में भोजन परोसना, प्रत्येक रविवार को अपने कक्ष की सफाई करना, गौ सेवा करना, अपने परिसर के बगीचे में लगे पौधों की देखभाल करना।

 
(12) सुरक्षा व्यवस्था – छात्रावास का परिसर चारों ओर से ऊँची दीवारों से पूर्णतः सुरक्षित है। मुख्य द्वार पर सुरक्षा प्रहरी की व्यवस्था है। सुरक्षा को सुदृढ़ करने हेतु चारों ओर कैमरे लगे हैं। 

विद्यापीठ और छात्रावास दोनों ही महिला प्रधान हैं। सभी कर्मचारी भी महिलाएँ ही है। यहाँ किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूर्णतः वर्जित है।

 
(13) अभिभावक संपर्क – छात्रावास में अभिभावक सम्पर्क हेतु दूरभाष की सुविधा उपलब्ध है जिस पर अभिभावक अधिकृत मोबाईल नम्बर द्वारा ही छात्राओं से बात कर सकते है जिसका समय रविवार प्रातः 10 से 5 बजे तक रहता है तथा माह के अंतिम रविवार को प्रातः 10 बजे से शाम 4 बजे तक अधिकृत परिवारजन छात्राओं से व्यक्तिगत रूप से मिल सकते हैं। मिलने की अवधि अधिकतम 2 घंटे होगी और निर्धारित क्षेत्र में ही। फॉर्म भरते समय उक्त सभी बिन्दुओं को ध्यान से पढ़ें।
प्रत्येक आंतरिक मूल्याकंन के बाद अभिभावक आचार्य मीटिंग का
प्रावधान हैं जिसमें छात्राओं के बारे में फीडबैक दिया जाता है।

परिचय

भारतीय संस्कृति में प्राचीन ऋषि प्रणित शिक्षा का सर्वथा लोप होना प्रत्यक्ष दिखाई देता है। शिक्षा का सामान्य अर्थ हमारी अंतर्निहित क्षमताओं का प्रकटीकरण ही है।

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